Sunday, 29 June 2014

दिल हाथ में लिए रखे हैं....

दिल की देहलीज़ पे यादों के दिए रखे हैं..
आज तक हमने ये दरवाज़े खुले रखे हैं...

इस कहानी के वो किरदार कहाँ से लाऊं
वही दरिया है... वही कच्चे घड़े रखे हैं...

हम पे जो गुज़रीं... न बताया.. न बताएँगे कभी
कितने ख़त अब भी तेरे नाम लिखे रखे हैं...

आपके पास खरीदारी की कुव्वत है अगर
आज सब लोग दुकानों में सजे रखे हैं....

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