Sunday, 4 August 2024

क्या ही लिखी। कुछ तो लिखूं

 मैं तो तुमसे दूर रहा अपने मन की कहने तक,

और तुम मुझसे दूर रही अपने मन की सुनने तक 

क्लासरूम के बाहर उस दिन जब तुम निपट अकेले में 

अनायास यूँ टकराई थी केमिस्ट्री का पेपर ही था

पास तुम्हारे हाथों में,

अर्थशास्त्र का अंतिम पर्चा

मैं लिख आया शायद


तब मुझको कह देना था,

कैसा हुआ है पेपर ?

मुस्कुरा के तुम कह देती "अच्छा"

 ...और कितना अच्छा होता । 

जैसे "मांग का नियम"

निर्धारित कर देता, मेरा भी एक मूल्य

या फिर कोई समीकरण ही हल हो जाता ।

Saturday, 28 December 2019

मत आना

अब अगर आओ तो जाने के लिए मत आना
सिर्फ एहसान जताने के लिए मत आना

मैंने पलकों पे तमन्‍नाएँ सजा रखी हैं
दिल में उम्‍मीद की सौ शम्‍मे जला रखी हैं
ये हसीं शम्‍मे बुझाने के लिए मत आना

प्‍यार की आग में जंजीरें पिघल सकती हैं
चाहने वालों की तक़दीरें बदल सकती हैं
तुम हो बेबस ये बताने के लिए मत आना

अब तुम आना जो तुम्‍हें मुझसे मुहब्‍बत है कोई
मुझसे मिलने की अगर तुमको भी चाहत है कोई
तुम कोई रस्‍म निभाने के लिए मत आना

Monday, 27 August 2018

.  *फिर घमंड कैसा*
 
एक माचिस की तीली,
एक घी का लोटा,
लकड़ियों के ढेर पे,
कुछ घण्टे में राख़...
बस इतनी सी है -
      *आदमी की औक़ात !!*

एक बूढ़ा बाप शाम को मर गया,
अपनी सारी ज़िन्दगी,
परिवार के नाम कर गया,
कहीं रोने की सुगबुगाहट,
तो कहीं फुसफुसाहट...
अरे जल्दी ले जाओ
कौन रखेगा सारी रात...
बस इतनी सी है -
       *आदमी की औक़ात !!*

मरने के बाद नीचे देखा ,
नज़ारे नज़र आ रहे थे,
मेरी मौत पे .....
कुछ लोग ज़बरदस्त,
तो कुछ ज़बरदस्ती
रो रहे थे।
नहीं रहा...चला गया...
चार दिन करेंगे बात...
बस इतनी सी है -
       *आदमी की औक़ात !!*

बेटा अच्छी तस्वीर बनवायेगा,
सामने अगरबत्ती जलायेगा,
ख़ुश्बुदार फूलों की माला होगी...
अख़बार में अश्रुपूरित श्रृद्धांजली होगी...
बाद में उस तस्वीर पे,
जाले भी कौन करेगा साफ़...
बस इतनी सी है -
       *आदमी की औक़ात !!*

ज़िन्दगी भर,
मेरा-मेरा-मेरा किया...
अपने लिए कम,
अपनों के लिए ज़्यादा जिया...
कोई न देगा साथ...
जायेगा ख़ाली हाथ...
क्या तिनका ले जाने की भी है  औक़ात ???
फिर घमंड कैसा ?
*बस इतनी सी है - आदमी की औक़ात !!*

Friday, 24 August 2018


*तेरी किताब के हर्फ़े, समझ नहीं आते।*
*ऐ ज़िन्दगी तेरे फ़लसफ़े, समझ नहीं आते।।*
*कितने पन्नें हैं, किसको संभाल कर रखूँ।*
*और कौन से फाड़ दूँ सफ़हे, समझ नहीं आते।।*
*चौंकाया है ज़िन्दगी, यूँ हर मोड़ पर तुमने।*
*बाक़ी कितने हैं शगूफे, समझ नहीं आते।।*
*हम तो ग़म में भी, ठहाके लगाया करते थे।*
*अब आलम ये है, कि.. लतीफे समझ नहीं आते।।*
*तेरा शुकराना, जो हर नेमत से नवाज़ा मुझको।*
*पर जाने क्यों अब तेरे तोहफ़े, समझ नहीं आते।।*
                 *- करण शादीजा*

Saturday, 28 July 2018

जाने क्यूँ,
अब शर्म से,
चेहरे गुलाब नहीं होते।
जाने क्यूँ,
अब मस्त मौला मिजाज नहीं होते।

पहले बता दिया करते थे,
दिल की बातें।
जाने क्यूँ,
अब चेहरे,
खुली किताब नहीं होते।

सुना है,
बिन कहे,
दिल की बात,
समझ लेते थे।
गले लगते ही,
दोस्त हालात,
समझ लेते थे।

तब ना फेस बुक था,
ना स्मार्ट फ़ोन,
ना ट्विटर अकाउंट,
एक चिट्टी से ही,
दिलों के जज्बात,
समझ लेते थे।

सोचता हूँ,
हम कहाँ से कहाँ आगए,
व्यावहारिकता सोचते सोचते,
भावनाओं को खा गये।

अब भाई भाई से,
समस्या का समाधान,
कहाँ पूछता है,
अब बेटा बाप से,
उलझनों का निदान,
कहाँ पूछता है,
बेटी नहीं पूछती,
माँ से गृहस्थी के सलीके,
अब कौन गुरु के,
चरणों में बैठकर,
ज्ञान की परिभाषा सीखता है।

परियों की बातें,
अब किसे भाती है,
अपनों की याद,
अब किसे रुलाती है,
अब कौन,
गरीब को सखा बताता है,
अब कहाँ,
कृष्ण सुदामा को गले लगाता है

जिन्दगी में,
हम केवल व्यावहारिक हो गये हैं,
मशीन बन गए हैं हम सब,
इंसान जाने कहाँ खो गये हैं!

इंसान जाने कहां खो गये हैं...

Friday, 24 April 2015

जैसे अभी अभी की बात है...

कितना वक़्त हुआ
तुम्हें गए..

पर लगता है
जैसे अभी अभी की बात है...

लगता है जैसे..
बिछड़ते वक़्त अभी अभी
आख़री बार मुड़ कर देखा है

तुमने... और जैसे अभी अभी
उदास सा मुस्कुराया हूँ मैं... मुझे मुस्कुराते देख
जैसे अभी अभी
हैरान हुई हो तुम...

और जैसे अभी अभी..
अपनी भर आई आँखों को छुपाने के लिए दूसरी तरफ़ देखने
लगा हूँ मैं... देखो ना..
कितना वक़्त हुआ
तुम्हे गए..
पर लगता है
जैसे अभी अभी की बात है...

Friday, 12 September 2014

Midnight moonlight

Midnight, not a sound from the pavement
Has the moon lost her memory??
She is smiling alone
In the lamplight
The withered leaves collect at my feet
And the wind begins to moan

Memory, all alone in the moonlight
I can smile at the old days
Life was beautiful then
I remember
The time i knew what happiness was
Let the memory live again...