Friday, 12 September 2014

Midnight moonlight

Midnight, not a sound from the pavement
Has the moon lost her memory??
She is smiling alone
In the lamplight
The withered leaves collect at my feet
And the wind begins to moan

Memory, all alone in the moonlight
I can smile at the old days
Life was beautiful then
I remember
The time i knew what happiness was
Let the memory live again...

Friday, 11 July 2014

Koi Aisa Bhi To Hua Kare

Koi aisa bhi to hua kare
Meri dhadkano ko suna kare
Main ye zindagi us pe waar doon
Jo khloos-e-dil se wafa kare
Mere karb ko wo samajh sake
Mere dard ki wo dawa kare
Mujhe uss ke ishq pe naaz ho
Wo talab mein meri raha kare
Meri LAAJ uska GUROOR ho
Meri aabroo ka difa kare
Kare mosamon ke azaab mein wo bahar ban ke mila kare
Jo zubaan meri khamosh ho
To jhank dil mein liya kare
Mera dukh uska bhi dard ho
Mere saath wo bhi jala kare

Sunday, 29 June 2014

दिल हाथ में लिए रखे हैं....

दिल की देहलीज़ पे यादों के दिए रखे हैं..
आज तक हमने ये दरवाज़े खुले रखे हैं...

इस कहानी के वो किरदार कहाँ से लाऊं
वही दरिया है... वही कच्चे घड़े रखे हैं...

हम पे जो गुज़रीं... न बताया.. न बताएँगे कभी
कितने ख़त अब भी तेरे नाम लिखे रखे हैं...

आपके पास खरीदारी की कुव्वत है अगर
आज सब लोग दुकानों में सजे रखे हैं....

इंतज़ार आज भी है...

किसी नज़र को तेरा इंतज़ार आज भी है
कहा हो तुम के ये दिल बेक़रार आज भी है...

वो वादियाँ, वो फिजायें के हम मिले ये जहाँ
मेरी वफ़ा का वही पर मज़ार आज भी है...

न जाने देख के क्यों उनको ये हुआ एहसास
के मेरे दिल पे उन्हें इख्तियार आज भी है...

वो प्यार जिसके लिए हमने छोड़ दी दुनियाँ
वफ़ा की राह पे घायल वो प्यार आज भी है...

यकीन नहीं है मगर आज भी ये लगता है
मेरी तलाश में शायद बहार आज भी है...

किसी नज़र को तेरा इंतज़ार आज भी है
कहा हो तुम के ये दिल बेकरार आज भी है...

Thursday, 19 June 2014

I am A Writer

I'm a writer,
With only a pen, a pad...
And a heart full of dream
.
I'm a painter
With only a brush, an eye...
And a palette full of colour
.
I'm like a bird
With a song, a chord...
And a voice full of desire
.
I'm like a man
With no path, or a purpose...
And whose only gift is Love.

Tuesday, 17 June 2014

अभी मैं जिंदा हूँ....

मुश्किलें जरुर है, मगर ठहरा नही हूँ मैं.
मंज़िल से जरा कह दो, अभी पहुंचा नही हूँ मैं.

कदमो को बाँध न पाएंगी, मुसीबत कि जंजीरें,
रास्तों से जरा कह दो, अभी भटका नही हूँ मैं.

सब्र का बाँध टूटेगा, तो फ़ना कर के रख दूंगा,
दुश्मन से जरा कह दो, अभी गरजा नही हूँ मैं.

दिल में छुपा के रखी है, लड़कपन कि चाहतें,
दोस्तों से जरा कह दो, अभी बदला नही हूँ मैं.

" साथ चलता है, दुआओ का काफिला,
किस्मत से जरा कह दो, अभी तनहा नही हूँ मैं.

Saturday, 14 June 2014

आखिर ऐ क्यूँ है....?

जब नहीं तुझको यक़ीं अपना समझता क्यूँ है ?
रिश्ता रखता है तो फिर रोज़ परखता क्यूँ है ?

हमसफ़र छूट गए मैं जो तेरे साथ चला
वक़्त! तू साथ मेरे चाल ये चलता क्यूँ है ?

मैंने माना कि नहीं प्यार तो फिर इतना बता
कुछ नहीं दिल में तो आँखों से छलकता क्यूँ है ?

कह तो दी बात तेरे दिल की तेरी आँखों ने
मुँह से कहने की निभा रस्म तू डरता क्यूँ है ?

दाग़-ए-दिल जिसने दिया ज़िक्र जब आए उसका
दिल के कोने में कहीं दीप- सा जलता क्यूँ है ?

रख के पलकों पे तू नज़रों से गिरा देता है
मैं वही हूँ तेरा अन्दाज़ बदलता क्यूँ है ?

या रब्बा...

रब ने नवाजा हमें जिंदगी देकर;
और हम शौहरत मांगते रह गये;

जिंदगी गुजार दी शौहरत के पीछे;
फिर जीने की मौहलत मांगते रह गये।

तेरी इस दुनिया में ये मंज़र क्यों है, कहीं ज़ख्म तो कहीं पीठ में खंजर क्यों है?

सुना है तू हर ज़र्रे में है रहता,
फिर ज़मीं पर कहीं मस्जिद तो कहीं मंदिर क्यों है?

जब रहने वाले दुनियां के हर बन्दे तेरे हैं, फिर कोई किसी का दोस्त तो कोई दुश्मन क्यों है?

तू ही लिखता है हर किसी का मुक़द्दर, फिर कोई बदनसीब तो कोई मुक़द्दर का सिक्कंदर क्यों है?

एक खवाइश अधूरी सी....

एक कहानी अधूरी सी
एक रिशता बेनाम सा
एक ज़िन्दगी गुमनाम सी
एक ख्वाईस अनजानी सी

सोचा चलो मिलकर
पूरी कर लें इस कहानी को
नाम दे दे इस रिशते को ढूंढ ले अपनी ज़िन्दगी को

अंजाम दे ले अपनी ख्वाईसो को .....
पर देखों तो मेरी मजबूरी
कहानी क्या होगी ये पूरी
रिशते का कुछ तो नाम होगा

ज़िन्दगी क्या ऐसे खो जाएगी ....
ख्वाइसें क्या यूंही खत्म हो जाऐगी ...

सवालों से उलझी ये कहानी बेडियों से बंधा ये रिशता
अंधेरो में खोई ये ज़िन्दगी ...
शायद अनजानी रह जाएँगी ख्वाइसें.......

Friday, 13 June 2014

कुछ जीत लिखूँ या हार लिखूँ ....
या दिल का पहला प्यार लिखूँ .....

कुछ अपनो के जज्बात लिखूँ या सपनों की सौगात लिखूँ
मैं खिलता सुरज आज लिखूँ या चेहरा चाँद गुलाब लिखूँ ...

वो डूबते सुरज को देखूँ या उगते फूल की साँस लिखूँ
वो पल में बीते रात लिखूँ या सदियों लंम्बी रात लिखूँ

सागर सा गहरा हो जांऊ या अंम्बर का विस्तार लिखूँ
मैं तुमको अपने पास लिखूँ या दूरी का एहसास लिखूँ

वो पहली पहली प्यास लिखूँ या निशछल पहला प्यार लिखूँ
सावन की बारिश में भीगूँ या मै आँखो की बरसात लिखूँ ....

कुछ जीत लिखूँ या हार लिखूँ
या दिल का सारा प्यार लिखूँ ..